SUNO-GUNO-TAB-DHUNO

< a href=”http://www.power26.com/wp-content/uploads/2014/11/IMG_20141025_101212.jpg”>IMG_20141025_101212आजकल इन्टरनेट का प्रचलन बहुत तेजी से बढ़ रहा हैं, और हमारे पुर्वजो के सिन्धातो को, जो वे अपने समय मे, अशिक्षित होने के बाबजूद, बहुत सरल शब्दों में तथा स्थानीय भाषा मे और बहुत ही छोटे वाक्यो मे बहुत बिन्रम भाव मे कह दिया करते थे। उसी को आज बहुत सुन्दर शब्दों मे सजाकर, उसकी बिस्तार से ब्यख्या करके, उसे बिभिन्न स्किल्स/कौशल का नाम देकर हमारे नवयुवकों को इन्टरनेट पर दिखाया जा रहा है।
उन्ही पूराने सिन्धान्तो मे से एक है”सुनो-गुनो-तब धुनो”।
सोचिए जरा,”सुनों, गुनो, तब धुनो ” से हमारे पुर्वजो का क्या तात्पर्य रहा होगा। इसे समझने की जरूरत है।
यह सिन्धान्त एक आदमी के जिन्दगी की आधारशिला होनी चाहिये क्य़कि “जिम्मेदारी” “रिस्पान्सबिलीटी” शब्द का बहुत ही सुन्दर ढ़ंग से लोगो ने ब्यख्या की है।
यह सिन्धान्त “कम्यूनिकेशन स्किल” तथा प्रोयेक्टीबिटी का आधार है।
दोश्तो,
इस संसार मे तीन तरह के ब्यक्तियों के बारे मे बताया गया हैं ——
(१) जिम्मेदार ब्यक्ति
(२) गैर जिम्मेदार ब्यक्ति
(३) उदासीन ब्यक्ति
हमे यह चुनना होता है कि हम जिम्मेदार बनेंगे या गैर जिम्मेदार बनेगें या उदासीन रहेंगे।
ईश्वर ने हमें यह चूनाव करने की शक्ति दिया है और माता-पिता भी हमें जिम्मेदार बनाना चाहते है।लेकिन हम अपने साथ घटने वाली हर बुरी घटनाओ के लिये दूसरो को जिम्मेदार बनाकर खुद गैरजिम्मेदार बन जाते है।
अगर हम जिम्मेदार बनना चाहते है तो सबसे पहले हमे दूसरो की निन्दा करना,आलोचना करना,शिकायत करना छोडंकर उसकी सच्ची प्रं शंशा करना,सम्मान करना सीखना होगा । क्योकि यही सच्चे रिलेशनशिप का आधार है।